बडती फ़ीस पर छात्र ने की आत्महत्या

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1. आई आई टी गुवाहाटी में दो दिन पहले केमिकल इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष के छात्र ने आत्महत्या कर ली है। शायद अवसाद के कारण। कृपया इसे उठाएं

2. प्राइवेट स्कूल में शिक्षकों से सैलरी के खाते में 70,000 पर साइन कराया जाता है मगर उनके हाथ में दिया जाता है 18,000 रुपये प्रति माह। कृपया हमारी आवाज़ उठाएं

3. पी जी आई रोहतक के डॉक्टर हड़ताल पर हैं। वे इंटर्न का भत्ता 12000 से बढ़ाकर 17,900 किए जाने की मांग कर रहे हैं। इन्हें भी प्राइम टाइम से उम्मीद है क्योंकि नेशनल मीडिया उठा नहीं रहा है।

4. चेन्नई में एक इंजीनियरिंग कालेज है जो प्रोजेक्ट पब्लिश कराने के लिए 9000 रुपये मांग रहा है जबकि रेट 1500 का है। अटेंडेंस कम पड़ने पर फाइन के नाम पर 3000 रुपये ले रहा है।

5. उत्तराखंड में कृषि डिप्लोमाधारियों का वेतन PRD जवानों से कम हैं। जवानों को 11,500 मिलता है और हमें मात्र 10,000। हम लोग आठ साल से ठेके पर काम कर रहे हैं और इसी सैलरी पर। तीन साल पहले 15,000 देने का आदेश हुआ था लेकिन आज तक पैसा नहीं मिला। कृपया आवाज़ उठाएं

6. यूपी के आयुर्वेदिक कालेजों की हालत बहुत ख़राब है। आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल चुनार जनपद मिर्जापुर कॉलेज में छात्रों के साथ अवैध वसूली हो रही है। हमने काउंसलिंग के वक्त ढाई लाख रुपये लिए गए। कहा गया कि एडमिशन होने पर एडजस्ट कर लिया जाएगा। आज तक एडजस्ट नहीं किया गया है। हम लोगों ने मुख्यमंत्री से लेकर सभी अधिकारियों को शिकायत भेजी है मगर कोई कुछ नहीं बोलता है।

7. यूपी में फार्मासिस्ट की बहाली नहीं होती है। ठेके पर रखे जाते हैं। हमारी पढ़ाई की फीस और डिग्री की वैल्यू बेकार जा रही है। कृपया देखें।

8. CBSE ने सितंबर 2016 के बाद से CTET का इम्तहान नहीं कराया है। बीएड करने के बाद ये इम्तहान पास करना ज़रूरी है तभी कोई केंद्रीय विद्यालय, सैनिक स्कूल और जवाहर नवोदय विद्यालय में शिक्षक के लिए अप्लाई कर सकता है। इम्तहान न होने से बहुतों को इन नौकरियों में पात्रता नहीं मिल रही है।

9. MPPSC ने अस्सिटेंट प्रोफसरों की भर्ती को मज़ाक बना रखा है। यह परीक्षा 2014 से हो रही है। 2014, 2016 और 2018 में कैंसिल हो चुकी है। हम लोग नेट पास कर बैठे हैं, कालेज में शिक्षक नहीं हैं। बताइये क्या करें।

मेरे लिए इन सभी समस्याओं को दिखाना या इनकी पुष्टि कर पाना संभव नहीं है। परेशान नौजवानों ने लिखा है। न तो इनता संसाधन है और न इतने रिपोर्टर। जिन चैनलों के पास रिपोर्टरों की भरमार हैं, वे इस सूची से उठाकर कर सकते हैं। जनता का ही कल्याण होगा। मुझे मेरी स्टोरी या तेरी स्टोरी में शुरू से कोई दिलचस्पी नहीं रही है। रिपोर्टर की कभी कोई स्टोरी नहीं होती है। स्टोरी जनता की होती है। नौजवानों को सारी सरकारों ने जम कर उल्लू बनाया है और ख़ुशी की बात है कि नौजवानों को उल्लू बनाना आसान भी है। थोड़ी अक्ल होती तो अपनी अपनी रैली के बजाए ये सब एक दूसरे की रैली में भी जाते और शांतिपूर्ण तरीके से बड़ा आंदोलन करते। आखिर एस एस सी के लिए आवाज़ उठाने गए छात्रों का इन्हीं बेरोज़गारों ने नहीं दिया। जब तक सब नहीं मिलेंगे, अपवाद छोड़ कर इन्हें अपनी लड़ाई हारनी ही होगी। नौजवान स्वार्थी हो गए हैं। उन्हें दूसरे की समस्या से मतलब नहीं। वर्ना सब एक दूसरे के साथ हो रही नाइंसाफी की कहानी को शेयर कर रहे होते। इतनी सी बात इन्हें समझ नहीं आती है।

इनमें से कई ख़बरों को स्थानीय पत्रकार कवर भी करते हैं, मगर कोई असर नहीं होता है। इन समस्याओं के समाधान की नाकामी बताती है कि क्यों हमारी राजनीति हमेशा फर्ज़ी थ्योरी में उलझी रहती है। क्योंकि हर किसी दल का या हर किसी नेता का प्रैक्टिकल का रिकार्ड बहुत ख़राब है। छत्तीसगढ़ से किसी ने लिखा है कि पोस्ट ग्रेजुएट साइंस के लिए टीचर नहीं हैं। लैब नहीं है। हमारा देश वाकई थ्योरी में चल रहा है। हम सब भी थ्योरी पर ही रिएक्ट करते हैं मगर इन परेशानियों को देखिए, उन्हें किस तरह से मार रही हैं। ये पीड़ित हैं मगर ये भी थ्योरी के आधार पर ही पोलिटिक्स करते होंगे। इसलिए किसी के लिए आसान रास्ता नहीं है। हम सब अपनी अपनी बाइक लेकर मौत का कुआं में करतब दिखा रहे हैं।

                                                                                                                                                                                                                              रविश कुमार

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मुझे बचपन से पड़ने लिखने का शोक हे मुझे रोज की खबरों से नियमित रूप से रूबरू होना ओर लोगो को जागरूक करना अच्छा लगता हे में अपनी इस आदत के जरिये लोगो को आधुनिक जानकारी यो रूबरू करवाऊंगा

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